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रहूँ मैं कहीं भी ...

 रहूँ मैं कहीं भी  घर  तो मेरा गाँव में ही है  AC में वो  नींद कहाँ   पेड़ों  के छाँव में जो है  बड़ा में कितना भी हो जाऊँ  स्थान तो मेरा मम्मी-पापा के पाँव में ही है  रहूँ मैं कहीं भी  घर  तो मेरा गाँव में ही है  बाहर निकला दुनिया घूमा  पूरे किए बहुतेरे सपने  उमर बीत गयी तब एहसास हुआ  घर छूटा गाँव छूटा  छूट गए सब अपने  आज अकेला हूँ तो पता चला  असली कमाई तो प्रेम में ही है  रहूँ मैं कहीं भी  घर  तो मेरा गाँव में ही है 

Don't be quiet my love

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 How much I wish you be quiet Still I despair when you become quiet Are you angry? Are you sad? What's happening...why are you so quiet? My love for you makes me agitated My love for you makes me afraid I don't know what should I do I can't live with...or without you Crazy, you may think I am Crazy, I think I have become Your words affect me the most Without you I know I am lost You bring the worst out of me and the best You make me desire I be alone But when alone I just desire for you O love, what magic have you done?

Ramblings of a drunkard...

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A drink, a large one should I say And the sleep follow it with. Lovely dinner, I should not forget They seem to place my mind. They seem to have healing effect. I seem lot calmer and cheerful I should, sincerely, accept. I still miss you Your thoughts still flood my head A little pain in heart, and moisten my eyes. But then aren't they always of deal? A deal, we called Move On, Concentrate on career and prosper. Both you and your family I have lost rhyme now, but the feelings exist I may say otherwise, but I still adore you

Normal I am going to be

 Poetry seems to occur to me again Words seem to reflow I think I am going to in back gear A complete person from hollow. Your thoughts seem to provoke ideas, Rhymes seem to reflow I am writing again Maybe deep or hollow. Who cares, why judge? At least I like it And as sure as I can be You would love to know Normal I am going to be. 

वस्त्र फटे तो रफ़ू किया जा सकता है

वस्त्र फटे तो रफ़ू किया जा सकता है । दिल टूटे तो फिर ना जुड़ते हैं ।। रेशम के धागे टूट के फिर जुड़ सकते हैं । रिश्तों के धागे से न खेलो ये टूटे तो फिर न कभी जुड़ते हैं ।। वादे वही करो जो निभा सकते हो । विश्वास टू टा तो फिर ये न जुड़ते हैं ।। बातों में मिठास रखो तो दिल जुड़ते हैं । कड़वी बातों से ही तो रिश्ते टूटते हैं ।। Clothing can be mend if torn Heart broken do not mend Silk thread can broken and joined again Do not play with the thread of relationships If broken, they never join again Promise only what you can do Faith broken then they don't join again Put sweetness in words to join hearts Relations are broken by bitter words -- 6/16/2020

देश में आज दिया जला है ...Today the whole country got lighted with oil lamps

ना दिवाली है ना नवरात्रि फिर भी देश में आज दिया जला है ना छठ है ना ही होली कोरोना से लड़ने पूरा देश चला है किसी ने दीपक जलाया किसी ने मोमबत्ती से किया प्रकाश किसी ने टॉर्च जलाया तो कोई फौन का फ्लैश किया झक्काश बल्ब बन्द हैं सारे फिर भी चारों ओर उजाला है दिये की रोशनी में देखो सारा देश एकजुट हो चला है कोई दिवाली नहीं आज फिर भी देश में दिया जला है हम नहीं वहाँ तो क्या मेरी आत्मा आज देशवासियों के साथ चला है देखो कितना प्यारा आज देश हुआ है घर घर आज दीपक जला है घर घर आज दीपक जला है। - April 5, 9pm Indian time the whole country switched  off their electric lights and lighted oil lamps, torches, candlelight, or even phone flashlights for 9 minutes to show solidarity as a nation.

बिल्लो अलविदा (Bella Ciao in Hindi)

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तड़के भोर मैं जब जागा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा , बिल्लो अलविदा तड़के भोर मैं जब जागा धान के खेतों को मैं भागा कीटों और मच्छरों के बीच ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा कीटों और मच्छरों के बीच भीषण मजूरी मुझे है करना जमींदार बेंत लिए है खड़ा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा जमींदार खड़ा है बेंत लिए खेतों में हमें है कमर तोड़ काम करना हे भगवन ! कैसी ये विपदा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा हे भगवन ! कैसी ये विपदा सुनो  मेरी तुम्हें हर रोज मैं याद करता और हर क्षण यहाँ जो है बीत रहा   ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा और हर क्षण यहाँ जो है बीत रहा यौवन है हमारा मीट रहा लेकिन इक दिन ऐसा भी आएगा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा लेकिन इक दिन ऐसा भी आएगा आज़ादी हमें भी मिलेगा                                                - Marc...

"हम" से "मैं" कब हो गया पता ही नहीं चला

"हम" से "मैं" कब हो गया पता ही नहीं चला स्कूल हुआ, कॉलेज उत्तीर्ण किया अच्छी नौकरियाँ भी पाया जिन्दगी तेरे इशारे पे मैं नाचता गया घर छूटा, रिश्ते टूटे, दोस्त यार सब बिखर गये तरक्की के नाम पे मैं देश भी छोड़ आया चलते चलते कब इतनी दूर निकल गया पता ही नहीं चला बेहतर जिन्दगी के बहाने जीना ही भूल गया कैसे एक गाँव का छोरा शहरी हो गया पता ही नहीं चला "हम" से "मैं" कब हो गया पता ही नहीं चला

New India has Risen देखो भारत जागा है

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हौसले हुये हैं बुलंद, उम्मीदें हैं जागी  स्वर्णिम सपने लिए देखो भारत जागा है गुलामी की जंजीरों को तोड़  एक नए सवेरे की ओर भागा है  बुज़दिलों आँखें खोलो देखो भारत जागा है नयी उमंगें , नयी  तरंगें , नये हैं हमारे विचार   उज्ज्वल भविष्य के लिए हमने उठाया है हथियार  ना जाति का, ना धर्म का, ना झूठे वादों का, न लुभाती नोटों का  प्रगति और आत्मसम्मान के लिए  हमने उठा लिया हथियार वोटों का  अंग्रेजों भारत छोड़ो  आया राज अब देश के बेटी-बेटों का  नहीं रुकेंगे , नहीं  झुकेंगे  बाँधा हमें राष्ट्रवादी धागा है  नकारों रास्ता छोड़ो  तरुण कर्मठ भारत जागा है  Twitter, TikTok और Facebook पे बात फैला दो  भेड़ियों के जंगल में आग लगा दो  स्वर्ण चिड़ी का पुनःनिर्माण होगा  क्योंकि अब परिश्रमी भारत जागा है बहुत हुआ "फूट डालो राज करो" देशभक्तों का अब खून खौला है इटालीयों अब भारत छोड़ो क्योंकि मेरा भारत अब...

आज के Liberals

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रोता है दिल देखके देश की क्या हालत हो गयी है      आज फिर एक बेटी Liberals के भेंट चढ़ गयी है अब वो मजे ले ले उसपे हुए जुल्म को उछालेंगे      कहानी को तोड़ मरोड़ अपना उल्लू सीधा करेंगे उनको ना मतलब सचाई से, या आसिफा के इंसाफ से      मतलब है उनको सिर्फ अपने politics और TRP से मत समझना उनका उद्देश्य जुल्मियों को सजा दिलाना है      उनका ध्येय तो बस हिन्दू धर्म को बदनाम करना है

Hote pankh mere to...

होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती उड़ उड़ के दूर डाल पे बैठ जाती तेरे खुनी पंजों से बच जाती होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती हवस की आग जो बुझाय है तूने एक मासूम की इज़्ज़त लूटा है तूने बेटी मैं किसी की, बहन किसी की मुझे दामिनी बनाया है तूने तेरे पकड़ मैं कभी न आती होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती सुनसान राह देख मुझे छेड़ दिया अकेली, अबला जान मुझे हर लिया कोई जटायु ना मुझे बचाया राहगीरों ने मुँह फेर लिया भागती, किसी डाली में छिप जाती होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती शायद तब भी मैं न बच पाती शायद तब पर  कुतरे  जाते मैं तड़पती, खूब छटपटाती लेकिन एक आखिरी उड़ान तो भरती भंवरी, इमराना, सौम्य या अनजाना शायद तब भी बनती लेकिन एक आखिरी उड़ान तो भरती पंख होते तो शायद बच जाती किसी की बेटी, किसी की बहन आज भी कहलाती सुनसान अंधेरी कोठरी में अकेले न रोती चुप चाप अंदर ही अंदर न घुटती सुबकियों में रातें न बैठती होते पंख अगर तो शायद बच जाती दूर कहीं किसी डाल पे बैठ जाती Hote pankh mere to main ud jaati Ud ud ke door daal pe baith jaati Tere khooni panjon se bach jaati Hote pankh mere to main ud jaati ...

Rahne do mujhe yahin

Ye sagar ki lahrein   Ye Lahron ka shor   Kar rahi hain Hamein jhanjod   Toko na mujhe tum   Roko na mujhe tum   Ja raha Hun main ye jag chhod   Ye khushiyan,   ye hasne ki baatein   Na karo tum mujhse Main doonga ro   Ye sagar ye lahrein, Ye sunsan raahein   Ye jhilmilate sitaare,   Ye Chandni raateein   Rahne do mujhe yahin   main na jaoonga kahin aur ये सागर की लहरें ये लहरों का शोर कर रही हैं हमें झंझोड़ टोको ना मुझे तुम रोको न मुझे तुम जा रहा हूँ मैं ये जग छोड़ ये खुशियां, ये हसने की बातें ना करो तुम मुझसे मैं दूंगा रो ये सागर ये लहरें, ये सुनसान राहें ये झिलमिलाते सितारे, ये चांदनी रातें रहने दो मुझे यहीं मैं ना जाऊँगा कहीं और --While at Goa with friends. Sitting at beach watching sea --Written on May 13, 2017 while chatting with friends in Goa

काश तुम्हे यकीन होता (Wish you had faith in me)

  दर्द तो इतने हैं कि सहे ना जा रहे हैं पन्नों पे शब्द आने से पहले आँखें छलक जा रहे हैं कलम चल गई, चार शब्द लिखे भी जा रहे हैं पर कमबख्त आँसू, ये कमबख्त आँसू अक्षर भिंगोए जा रहे हैं   कोई पूछे अगर कौन सा गम हो सकता है कोई पूछे कि मुझे कौन सा गम हो सकता है कैसे बताऊँ भले ही सख्त हूँ मैं लेकिन दिल तो अपना भी धड़कता है हर बात बता नहीं सकता, पर इतना तो समझो दोस्त कि कभी तेरे यार को भी हुआ था प्यार का रोग   सच है कि गम इस बात का है कि वो अपनी न हुई पर गम सिर्फ इस बात का नहीं कि वो अपनी न हुई और न शोक ये है कि अपनों ने की रुसवाई दिल रोता है सोच उसे भी मेरे प्यार में न दिखी सच्चाई   सिर्फ जुदा होने का गम होता तो शायद सह लेता लेकिन तड़प रहा हूँ मैं लेकिन तड़पता हूँ काश तुम्हें मेरे प्यार पे यकीन होता       - 7/2/2016

वो अपना प्यारा घर...

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जाने अनजाने पीछे मुड़के देखता हूँ बैठे बैठे कुछ सोचने लग जाता हूँ प्यार बेइंतहां करता हूँ तुमसे फिर भी हूँ रूठा सच मालूम है मुझे फिर भी बन बैठा हूँ झूठा डरता हूँ जाने से घर, हमारा वो प्यारा घर टूट जाऊँगा मैं अगर तुम ना हुई वहां अगर धडकनें तेज हो जाती हैं, साँसे फूल जाती हैं तुम न होगी सोचके ही मेरी आँहें निकल जाती हैं कदम लड़खड़ाती हैं, हाथ कंप जाती हैं तुम ना होगी सोचके ही पाँव थम जाती हैं सच मालूम है मुझे फिर भी बन हूँ अनजाना मेरी हालत देख अब पापा भी कहते हैं मुझे दीवाना कहने दो जो वो कहना चाहें, मुझे अब नहीं कोई परवाह तुम वापस आ जाओ जानु, मेरी है ये आखिरी चाह माँ, भाई, भाभी सब समझाना चाहते हैं कि जिनको जाना है, वो तो चले ही जाते हैं जग कहता है कि तुम बन चुकी हो जन्नत की परी मेरा दिल कहता हैं तुम अभी भी घर में हो दरवाजे पर खड़ी वहम की इस दुनिया को बन लिया अब अपना संसार तभी तो साल से नहीं गया हूँ घर, वो अपना प्यारा घर चौथी मंज़िल पर दायें मुड़ते ही वो लाल दरवाज़ा जिसके पीछे दो कमरों का महल था हमने सजाया सामान की कमी हमने प्यार से की थी पूरी याद आती है मुझे तुम...