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बिल्लो अलविदा (Bella Ciao in Hindi)

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तड़के भोर मैं जब जागा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा , बिल्लो अलविदा तड़के भोर मैं जब जागा धान के खेतों को मैं भागा कीटों और मच्छरों के बीच ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा कीटों और मच्छरों के बीच भीषण मजूरी मुझे है करना जमींदार बेंत लिए है खड़ा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा जमींदार खड़ा है बेंत लिए खेतों में हमें है कमर तोड़ काम करना हे भगवन ! कैसी ये विपदा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा हे भगवन ! कैसी ये विपदा सुनो  मेरी तुम्हें हर रोज मैं याद करता और हर क्षण यहाँ जो है बीत रहा   ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा और हर क्षण यहाँ जो है बीत रहा यौवन है हमारा मीट रहा लेकिन इक दिन ऐसा भी आएगा ओ बिल्लो अलविदा, अलविदा, अलविदा, बिल्लो अलविदा लेकिन इक दिन ऐसा भी आएगा आज़ादी हमें भी मिलेगा                                                - Marc...

"हम" से "मैं" कब हो गया पता ही नहीं चला

"हम" से "मैं" कब हो गया पता ही नहीं चला स्कूल हुआ, कॉलेज उत्तीर्ण किया अच्छी नौकरियाँ भी पाया जिन्दगी तेरे इशारे पे मैं नाचता गया घर छूटा, रिश्ते टूटे, दोस्त यार सब बिखर गये तरक्की के नाम पे मैं देश भी छोड़ आया चलते चलते कब इतनी दूर निकल गया पता ही नहीं चला बेहतर जिन्दगी के बहाने जीना ही भूल गया कैसे एक गाँव का छोरा शहरी हो गया पता ही नहीं चला "हम" से "मैं" कब हो गया पता ही नहीं चला

New India has Risen देखो भारत जागा है

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हौसले हुये हैं बुलंद, उम्मीदें हैं जागी  स्वर्णिम सपने लिए देखो भारत जागा है गुलामी की जंजीरों को तोड़  एक नए सवेरे की ओर भागा है  बुज़दिलों आँखें खोलो देखो भारत जागा है नयी उमंगें , नयी  तरंगें , नये हैं हमारे विचार   उज्ज्वल भविष्य के लिए हमने उठाया है हथियार  ना जाति का, ना धर्म का, ना झूठे वादों का, न लुभाती नोटों का  प्रगति और आत्मसम्मान के लिए  हमने उठा लिया हथियार वोटों का  अंग्रेजों भारत छोड़ो  आया राज अब देश के बेटी-बेटों का  नहीं रुकेंगे , नहीं  झुकेंगे  बाँधा हमें राष्ट्रवादी धागा है  नकारों रास्ता छोड़ो  तरुण कर्मठ भारत जागा है  Twitter, TikTok और Facebook पे बात फैला दो  भेड़ियों के जंगल में आग लगा दो  स्वर्ण चिड़ी का पुनःनिर्माण होगा  क्योंकि अब परिश्रमी भारत जागा है बहुत हुआ "फूट डालो राज करो" देशभक्तों का अब खून खौला है इटालीयों अब भारत छोड़ो क्योंकि मेरा भारत अब...

आज के Liberals

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रोता है दिल देखके देश की क्या हालत हो गयी है      आज फिर एक बेटी Liberals के भेंट चढ़ गयी है अब वो मजे ले ले उसपे हुए जुल्म को उछालेंगे      कहानी को तोड़ मरोड़ अपना उल्लू सीधा करेंगे उनको ना मतलब सचाई से, या आसिफा के इंसाफ से      मतलब है उनको सिर्फ अपने politics और TRP से मत समझना उनका उद्देश्य जुल्मियों को सजा दिलाना है      उनका ध्येय तो बस हिन्दू धर्म को बदनाम करना है

Hote pankh mere to...

होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती उड़ उड़ के दूर डाल पे बैठ जाती तेरे खुनी पंजों से बच जाती होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती हवस की आग जो बुझाय है तूने एक मासूम की इज़्ज़त लूटा है तूने बेटी मैं किसी की, बहन किसी की मुझे दामिनी बनाया है तूने तेरे पकड़ मैं कभी न आती होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती सुनसान राह देख मुझे छेड़ दिया अकेली, अबला जान मुझे हर लिया कोई जटायु ना मुझे बचाया राहगीरों ने मुँह फेर लिया भागती, किसी डाली में छिप जाती होते पंख मेरे तो मैं उड़ जाती शायद तब भी मैं न बच पाती शायद तब पर  कुतरे  जाते मैं तड़पती, खूब छटपटाती लेकिन एक आखिरी उड़ान तो भरती भंवरी, इमराना, सौम्य या अनजाना शायद तब भी बनती लेकिन एक आखिरी उड़ान तो भरती पंख होते तो शायद बच जाती किसी की बेटी, किसी की बहन आज भी कहलाती सुनसान अंधेरी कोठरी में अकेले न रोती चुप चाप अंदर ही अंदर न घुटती सुबकियों में रातें न बैठती होते पंख अगर तो शायद बच जाती दूर कहीं किसी डाल पे बैठ जाती Hote pankh mere to main ud jaati Ud ud ke door daal pe baith jaati Tere khooni panjon se bach jaati Hote pankh mere to main ud jaati ...

Rahne do mujhe yahin

Ye sagar ki lahrein   Ye Lahron ka shor   Kar rahi hain Hamein jhanjod   Toko na mujhe tum   Roko na mujhe tum   Ja raha Hun main ye jag chhod   Ye khushiyan,   ye hasne ki baatein   Na karo tum mujhse Main doonga ro   Ye sagar ye lahrein, Ye sunsan raahein   Ye jhilmilate sitaare,   Ye Chandni raateein   Rahne do mujhe yahin   main na jaoonga kahin aur ये सागर की लहरें ये लहरों का शोर कर रही हैं हमें झंझोड़ टोको ना मुझे तुम रोको न मुझे तुम जा रहा हूँ मैं ये जग छोड़ ये खुशियां, ये हसने की बातें ना करो तुम मुझसे मैं दूंगा रो ये सागर ये लहरें, ये सुनसान राहें ये झिलमिलाते सितारे, ये चांदनी रातें रहने दो मुझे यहीं मैं ना जाऊँगा कहीं और --While at Goa with friends. Sitting at beach watching sea --Written on May 13, 2017 while chatting with friends in Goa

काश तुम्हे यकीन होता (Wish you had faith in me)

  दर्द तो इतने हैं कि सहे ना जा रहे हैं पन्नों पे शब्द आने से पहले आँखें छलक जा रहे हैं कलम चल गई, चार शब्द लिखे भी जा रहे हैं पर कमबख्त आँसू, ये कमबख्त आँसू अक्षर भिंगोए जा रहे हैं   कोई पूछे अगर कौन सा गम हो सकता है कोई पूछे कि मुझे कौन सा गम हो सकता है कैसे बताऊँ भले ही सख्त हूँ मैं लेकिन दिल तो अपना भी धड़कता है हर बात बता नहीं सकता, पर इतना तो समझो दोस्त कि कभी तेरे यार को भी हुआ था प्यार का रोग   सच है कि गम इस बात का है कि वो अपनी न हुई पर गम सिर्फ इस बात का नहीं कि वो अपनी न हुई और न शोक ये है कि अपनों ने की रुसवाई दिल रोता है सोच उसे भी मेरे प्यार में न दिखी सच्चाई   सिर्फ जुदा होने का गम होता तो शायद सह लेता लेकिन तड़प रहा हूँ मैं लेकिन तड़पता हूँ काश तुम्हें मेरे प्यार पे यकीन होता       - 7/2/2016